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UPSC क्वालिफाइंग हिंदी भाषा प्रश्नपत्र

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प्रश्नों की प्रकृति 

हिंदी भाषा प्रश्नपत्र के सभी प्रश्न अनिवार्य होते हैं, जिनका उत्तर उम्मीदवार को हिंदी भाषा में लिखना होता है (यदि किसी प्रश्न विशेष में अन्यथा निर्दिष्ट न हो)। इस प्रश्नपत्र में सामान्यत: 6 प्रश्न पूछे जाते हैं जो एक से अधिक उपखंडों में विभाजित रहते हैं। प्रत्येक प्रश्न के ल…

  • हिंदी भाषा प्रश्नपत्र के सभी प्रश्न अनिवार्य होते हैं, जिनका उत्तर उम्मीदवार को हिंदी भाषा में लिखना होता है (यदि किसी प्रश्न विशेष में अन्यथा निर्दिष्ट न हो)।
  • इस प्रश्नपत्र में सामान्यत: 6 प्रश्न पूछे जाते हैं जो एक से अधिक उपखंडों में विभाजित रहते हैं। प्रत्येक प्रश्न के लिये उत्तर की शब्द सीमा एवं उसके लिये निर्धारित अंक प्रश्न के सामने अंकित रहते हैं।
  • यह प्रश्नपत्र कुल 300 अंकों का होता है।
  • वर्तमान परीक्षा प्रणाली के अनुसार इस प्रश्नपत्र का पहला प्रश्न निबंध लेखन (Essay Writing) से संबंधित होता है, जिसमें दिये गए 4 विभिन्न विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 600 शब्दों में निबंध लिखना होता है। इसके लिये 100 अंक निर्धारित किये गए हैं।
  • दूसरा प्रश्न गद्यांश (passage) से संबंधित होता है, जिसमें दिये गए गद्यांश पर आधारित 5-6 प्रश्नों का उत्तर लिखना होता है। इसके लिये 60 अंक निर्धारित किये गए हैं।
  • तीसरा प्रश्न सारांश लेखन (Precis) से संबंधित होता है, जिसमें दिये गए गद्यांश का लगभग एक-तिहाई (1/3) शब्दों में सारांश लिखना होता है। इसके लिये 60 अंक निर्धारित किये गए हैं।
  • चौथा एवं पाँचवाँ प्रश्न अनुवाद (Translation) से संबंधित होता है, जिसमें क्रमश: दिये हुए ‘हिंदी गद्यांश का अंग्रेज़ी में’ एवं ‘अंग्रेज़ी गद्यांश का हिंदी में’ अनुवाद करना होता है| प्रत्येक के लिये 20-20 अंक (कुल 40 अंक ) निर्धारित किये गए हैं।
  • छठा प्रश्न व्याकरण (Grammar) से संबंधित होता है, जिसके अंतर्गत वाक्य शुद्धीकरण (Corrections of sentences), मुहावरा/लोकोक्तियाँ (Idioms/Phrases), विलोम शब्द (Antonyms), पर्यायवाची शब्द (Synonyms) इत्यादि से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके लिये 40 अंक निर्धारित किये गए हैं।

रणनीति

यद्यपि इस प्रश्नपत्र में प्राप्त अंकों को मुख्य परीक्षा की मेधा सूची (Merit List) में नहीं जोड़ा जाता है लेकिन इसमें न्यूनतम अर्हता अंक (Qualifying Marks) प्राप्त करना अनिवार्य होता है।  इस प्रश्नपत्र के लिये न्यूनतम अर्हता अंक 25% (75 अंक) निर्धारित किये गए हैं, यानी जब तक क…

  • यद्यपि इस प्रश्नपत्र में प्राप्त अंकों को मुख्य परीक्षा की मेधा सूची (Merit List) में नहीं जोड़ा जाता है लेकिन इसमें न्यूनतम अर्हता अंक (Qualifying Marks) प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
  • इस प्रश्नपत्र के लिये न्यूनतम अर्हता अंक 25% (75 अंक) निर्धारित किये गए हैं, यानी जब तक कोई अभ्यर्थी इसमें या संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल किसी एक भाषा के प्रश्नपत्र के साथ-साथ क्वालिफाइंग अंग्रेज़ी भाषा के प्रश्नपत्र में न्यूनतम अर्हता अंक (75 अंक) प्राप्त नहीं कर लेता, तब तक  उसके अन्य प्रश्नपत्रों (निबंध, सामान्य अध्ययन एवं वैकल्पिक विषय) की उत्तर-पुस्तिकाओं का मूल्यांकन नहीं किया जाता है।
  • अंग्रेज़ी माध्यम के उम्मीदवारों के लिये यह प्रश्नपत्र जहाँ थोड़ा मुश्किल होता है (क्योंकि स्कूल एवं कॉलेज़/विश्वविद्यालय स्तर पर उनके अध्ययन एवं लेखन की भाषा सामान्यत: अंग्रेज़ी होती है)| वहीं हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों के लिये यह प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत आसान होता है (क्योंकि स्कूल एवं कॉलेज़/विश्वविद्यालय स्तर पर उनके अध्ययन एवं लेखन की भाषा सामान्यत: हिंदी होती है)।
  • इस प्रश्नपत्र में 25% अंक प्राप्त करना इतना भी आसान नहीं होता है। हाँ, पहले की अपेक्षा इसकी चुनौतियाँ कम अवश्य हुई हैं परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि इसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया जाए।
  • इस प्रश्नपत्र की तैयारी के लिये विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों की प्रकृति का सूक्ष्म अवलोकन करें तथा उन प्रश्नों के उत्तर लेखन का अभ्यास करें जिनमें आप सहज हों।
  • हिंदी के प्रश्नपत्र में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये हिंदी के व्याकरण (विलोम, पर्यायवाची, मुहावरा, शब्द-युग्म  इत्यादि) की समझ, सारांश लेखन, अपठित गद्यांश के साथ-साथ निबंध लेखन इत्यादि की अच्छी जानकारी आवश्यक है।
  • यदि आप एक अच्छा निबंध लिख लेते हैं तथा गद्यांश और सारांश से संबंधित प्रश्नों में औसत लेखन भी कर लेते हैं तो आप इस प्रश्नपत्र में क्वालिफाइंग अंक से अधिक अंक प्राप्त करने की स्थिति में रहेंगे।
  • निबंध और सारांश के लिये आप नियमित रूप से हिंदी भाषा के किसी दैनिक अख़बार जैसे– दैनिक जागरण (राष्ट्रीय संस्करण) के संपादकीय का अध्ययन कर सकते हैं।
  • हिंदी व्याकरण के लिये किसी स्तरीय पुस्तक जैसे– ‘वासुदेवनंदन प्रसाद’ एवं ‘हरदेव बाहरी’ की ‘सामान्य हिंदी एवं व्याकरण’ पुस्तक का अध्ययन किया जा सकता है।

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