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TRAFFIC

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TRAFFIC का पूरा नाम TRADE Record Analysis of Flora and Fauna In Commerce है।

  • TRAFFIC वन्यजीव व्यापार निगरानी नेटवर्क एक अग्रणी गैर-सरकारी संगठन है जो जैवविविधता संरक्षण और सतत विकास के संदर्भ में वन्यजीव व्यापार के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।
  • यह विश्व वन्यजीव कोष (WWF) और अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) का एक संयुक्त कार्यक्रम है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1976 में हुई और यह अनुसंधान संचालित, कार्योन्मुखी, वैश्विक नेटवर्क के रूप में विकसित हुआ जो अभिनव और व्यावहारिक संरक्षण समाधान देने के लिये प्रतिबद्ध है।
  • इसका मुख्यालय कैम्ब्रिज, इंग्लैंड में है ।
  • इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वन्य पौधों और पशुओं का व्यापार प्रकृति संरक्षण के लिये खतरा न हो।
  • अवैध वन्यजीव व्यापार कई प्रजातियों के विलुप्तप्रायः होने का एक प्रमुख कारण है।
    • उदाहरण के लिये, गैंडों के सींगों के अवैध व्यापार में बढ़ती मांग से गैंडों का अवैध शिकार वर्ष 2011 में सर्वोच्च स्तर पर पहुँच गया। केवल दक्षिण अफ्रीका में ही 448 गैंडों का अवैध शिकार हुआ। इससे अफ्रीकी गैंडों के मामले में संरक्षण की वर्षों की सफलता प्रभावित हो सकती थी।

प्रशासन

TRAFFIC का प्रशासन TRAFFIC समिति द्वारा चलाया जाता है। यह एक परिचालन समूह है जो कि TRAFFIC के सहयोगी संगठनों, WWF और IUCN के सदस्यों से मिलकर बना है।
TRAFFIC लुप्तप्रायः वन्य जीव जन्तु और वनस्पति पर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अभिसमय (CITES) के सचिवालय के साथ मिलकर काम करता है।
इसके स्टाफ में विविध पृष्ठभूमि से विशेषज्ञ शामिल होते हैं, जैसे-जीवविज्ञानी, संरक्षण विज्ञानी, अकादमिक, शोधकर्त्ता, संचारकर्त्ता या अन्वेषक आदि ।

कार्य

  • अपनी स्थापना से ही इसने अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार संधियों के विकास में सहायता की है।
  • यह नवीनतम वैश्विक रूप से आवश्यक प्रजाति व्यापार मुद्दों जैसे बाघ के अंगों, हाथी दांत और गैंडों के सींग के व्यापार पर संसाधनों, विशेषज्ञता और जागरूकता के उत्थान हेतु अपना ध्यान केन्द्रित करता है।
  • लकड़ी और मत्स्य उत्पादों जैसी वस्तुओं में बड़ी मात्रा के व्यावसायिक व्यापार पर भी ध्यान दिया जाता है और त्वरित परिणामों और नीतिगत सुधारों हेतु इन्हें कार्य से जोड़ा जाता है।

 

TRAFFIC एवं भारत

TRAFFIC, वन्यजीव कोष- भारत के एक प्रोग्राम डिवीज़न के रूप में वर्ष 1991 से कार्य कर रहा है। यह नई दिल्ली में स्थित है।

तभी से यह अवैध वन्यजीव व्यापार पर अध्ययन, निगरानी और रोकथाम में सहायता के लिये राष्ट्रीय और राज्य सरकारों तथा विभिन्न अन्य एजेंसियों के साथ नज़दीकी से कार्य कर रहा है।

क्षमता निर्माण कार्यक्रमों द्वारा भारत में प्रभावी वन्यजीव प्रवर्तन अंतर को पाटना

  • इस कार्यक्रम के तहत TRAFFIC अधिकारियों के विविध समूहों को प्रशिक्षण तथा सहयोग प्रदान करता है जो कि वन्यजीव प्रवर्तन और अन्य संबन्धित मुद्दों पर कार्य कर रहे हैं।

वन्यजीव व्यापार और इसकी प्रवृत्ति पर शोध करना और विश्लेषण उपलब्ध कराना

  • TRAFFIC इंडिया एक सतत चलती रहने वाली परियोजना है जिसमें भारत में तेंदुए और बाघके अवैध शिकार व व्यापार पर अध्ययन, मोर के पंखों का व्यापार, उल्लू का व्यापार, शिकारी समुदाय की गतिशीलता और चिकित्सीय पौधों का व्यापार, चिड़ियों का व्यापार और अन्य शामिल हैं।

जागरूकता का सृजन

  • TRAFFIC इंडिया का प्रथम उपभोक्ता जागरूकता अभियान ‘डू नॉट बाइ ट्रबल’ है जो पर्यटकों को यह सलाह देता है कि अपनी यात्रा के दौरान वे यादगार (Souvenir) के रूप में जो खरीदते हैं उसके प्रति सावधान रहें।
  • वर्ष 2008 से यह अभियान हवाई अड्डों, टाइगर रिज़र्व, राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव रिसॉर्ट्स/होटलों, ट्रैवल एजेंसियों, स्कूलों, कालेजों और अन्य प्रमुख स्थानों पर सफलतापूर्वक चल रहा है।
  • TRAFFIC का नवीनतम अभियान चार एशियाई बिग कैट्स- बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और क्लाउडेड लेपर्ड पर ‘वांटेड अलिव सीरीज़’ है। ये चारों अपने शारीरिक अंगों के अवैध व्यापार से संकटापन्न हैं।

वन्यजीव अपराधों का मुकाबला करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहन देना

  • दक्षिण एशिया वन्यजीव प्रवर्तन नेटवर्क (South Asia Wildlife Enforcement Network-SAWEN) की स्थापना हेतु दक्षिण एशियाई देशों को एकसाथ लाने के लिये TRAFFIC ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • SAWEN की औपचारिक स्थापना पारो (भूटान का एक शहर) में आयोजित एक अंतर-सरकारी बैठक में हुई। यह बैठक भूटान सरकार ने जनवरी, 2011 में आयोजित की थी।
  • इस पहल का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में वन्यजीव अपराध से मुक़ाबले हेतु ये देश मिलकर सहयोग करना है।
  • एशिया प्रशांत क्षेत्रीय नेटवर्क में कार्यालयों द्वारा पहचाने गए कुछ प्राथमिकता वाले मुद्दों और हस्तक्षेप के क्षेत्र:
    • संसाधन पर निर्भर और कमज़ोर समुदायों के लिये खाद्य/पानी/ऊर्जा सुरक्षा।
    • FPIC और सामाजिक सुरक्षा उपाय।
    • क्षेत्रीय और वैश्विक प्रक्रियाएँ (सीबीडी, पोस्ट-2015 एजेंडा और एसडीजी)।
    • प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरण शासन, सतत्् और प्रथागत भूमि उपयोग के लिये न्यायसंगत पहुँच।
    • सतत्् विकास के समर्थन में नागरिक समाज के साथ जुड़ाव और बड़े निर्वाचन क्षेत्रों का निर्माण।
    • सामाजिक प्रभाव और कल्याण संकेतक, बेहतर सामाजिक और आर्थिक उपाय।
    • हरित अर्थव्यवस्थाओं के सामाजिक आयाम, लचीली ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं का निर्माण।

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