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NEET विवाद: भारत में परीक्षाओं की अखंडता सुनिश्चित करना

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NEET-UG विवाद ने पेपर लीक (paper leaks) के व्यापक मुद्दे को उज़ागर किया है, जो ऐसा कदाचार है जिससे भारत वर्षों से ग्रस्त रहा है। पिछले सात वर्षों में 15 राज्यों में 70 पेपर लीक की घटनाएँ सामने आई हैं, जिससे देश में आयोजित परीक्षाओं की अखंडता पर गंभीर संदेह पैदा होता है।

पेपर लीक की इन घटनाओं ने 1.7 करोड़ आवेदकों के शेड्यूल को बाधित किया है। हाल ही में सामने आए NEET-UG 2024 पेपर लीक (जिसने 24 लाख से अधिक उम्मीदवारों की भागीदारी वाली अखिल भारतीय परीक्षा को प्रभावित किया) ने भारत की परीक्षा प्रणाली पर पेपर लीक माफिया के व्यापक प्रभाव को उज़ागर किया है।
राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) क्या है?

NEET-UG भारत में आयोजित सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (National Eligibility cum Entrance Test- NEET) हर वर्ष स्नातक (MBBS/BDS/आयुष पाठ्यक्रम) में प्रवेश के लिये राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (National Testing Agency- NTA) द्वारा आयोजित की जाती है।
NEET स्नातक स्तर पर राष्ट्रीय स्तर की एकल मेडिकल प्रवेश परीक्षा है जो चिकित्सा (मेडिकल), आयुष, BVSc (Bachelor of Veterinary Science) और AH (Animal Husbandry) कॉलेजों में प्रवेश के लिये हर साल आयोजित की जाती है।
NEET ऑनलाइन माध्यम से और 11 भाषाओं (अंग्रेज़ी, हिंदी, मराठी, ओडिया, तमिल, मराठी, उर्दू, बंगाली, तेलुगु, कन्नड़ एवं असमिया) में आयोजित की जाती है।
NTA से पहले यह परीक्षा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा आयोजित की जाती थी।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) क्या है?

परिचय:
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) का गठन वर्ष 2017 में सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत एक सोसाइटी के रूप में किया गया था।
यह उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश हेतु प्रवेश परीक्षा आयोजित करने वाला एक स्वायत्त एवं स्वनिर्भर परीक्षा संगठन है।
NTA शीर्ष स्तर की तीन स्नातक प्रवेश प्रवेश परीक्षाएँ आयोजित करता है- इंजीनियरिंग के लिये JEE-Main, चिकित्सा के लिये NEET-UG और विभिन्न अन्य स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिये CUET-UG ।
NTA स्नातकोत्तर प्रवेश के लिये CUET-PG, UGC-NET और CSIR UGC-NET परीक्षाएँ भी आयोजित करता है।
UGC-NET भारतीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में जूनियर रिसर्च फेलोशिप, सहायक प्राध्यापक के रूप में नियुक्ति और पीएचडी (PhD) में प्रवेश के लिये पात्रता के निर्धारण हेतु आयोजित परीक्षा है।
CSIR UGC-NET परीक्षा रासायनिक विज्ञान, पृथ्वी, वायुमंडलीय, महासागर एवं ग्रह विज्ञान, जीवन विज्ञान, गणितीय विज्ञान और भौतिक विज्ञान में पीएचडी स्तर पर प्रवेश हेतु आयोजित की जाती है।
NTA द्वारा आयोजित अन्य परीक्षाओं में कॉमन मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट (CMAT), होटल मैनेजमेंट जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन, ग्रेजुएट फार्मेसी एप्टीट्यूड टेस्ट के साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) में प्रवेश हेतु आयोजित प्रवेश परीक्षाएँ शामिल हैं।
शासन:
NTA की अध्यक्षता शिक्षा मंत्रालय द्वारा नियुक्त एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् करते हैं।
NTA के महानिदेशक (पद और वेतन भारत सरकार के संयुक्त सचिव के समकक्ष) इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) होते हैं।
भारत सरकार NTA और इसकी आम सभा को इसकी नीतियों के संबंध में निर्देश देती है तथा NTA ऐसे निर्देशों का पालन करने के लिये बाध्य है।
NTA का प्रशासन एक शासी निकाय को सौंपा गया है जहाँ उपयोगकर्ता संस्थानों के सदस्यों इसकी सदस्यता रखते हैं।
कार्य:
मौजूदा स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों में से पर्याप्त अवसंरचना वाले ऐसे साझेदार संस्थानों का चयन करना, जो उनकी शैक्षणिक दिनचर्या पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऑनलाइन परीक्षाओं के संचालन की सुविधा प्रदान कर सकें।
आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए सभी विषयों के लिये प्रश्न बैंक तैयार करना।
एक सुदृढ़ अनुसंधान एवं विकास संस्कृति को बढ़ावा देते हुए परीक्षण के विभिन्न पहलुओं के लिये विशेषज्ञों का एक समूह स्थापित करना।
ETS (Educational Testing Services) जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग करना।
भारत सरकार/राज्य सरकारों के मंत्रालयों/विभागों द्वारा सौंपी गई किसी भी अन्य परीक्षा का संचालन करना।

NEET-UG परिणाम, 2024 में विवाद क्यों उत्पन्न हुआ?

कदाचार के आरोप :
इस वर्ष 5 मई को 14 अंतर्राष्ट्रीय केंद्रों सहित 571 शहरों के 4,750 केंद्रों पर आयोजित NEET-UG परीक्षा में 24 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए।
इसका परिणाम 4 जून को घोषित किया गया, जिसके तुरंत बाद ही अभ्यर्थियों द्वारा 1500 से अधिक छात्रों को अनुग्रह अंक दिए जाने, असामान्य रूप से बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा पूर्ण अंक प्राप्त करने और प्रश्न-पत्र के लीक होने जैसे विभिन्न मुद्दे उठाए गए।
परिणामों से प्रकट हुआ कि 67 छात्रों ने पूर्ण 720 अंक हासिल किये, जो पिछले वर्षों के नतीजों की तुलना में उनके अधिक प्रतिशत को दर्शाता है। वर्ष 2023 में केवल दो छात्रों ने पूर्ण अंक हासिल किये थे, जबकि वर्ष 2022 में तीन, 2021 में दो और 2020 में एक छात्र ने पूर्ण अंक हासिल किये थे।
आरोप लगाया गया है कि टॉपरों में से छह हरियाणा के एक ही केंद्र से परीक्षा में शामिल हुए थे।
NTA का रुख :
NTA ने बचाव में कहा कि वर्ष 2024 की परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या वर्ष 2023 की तुलना में लगभग 3 लाख अधिक थी और उम्मीदवारों की संख्या में वृद्धि से स्वाभाविक रूप से उच्च स्कोर करने वाले छात्रों की संख्या में वृद्धि हुई।
NTA की ओर से यह दावा भी किया गया कि वर्ष 2024 की NEET परीक्षा पिछले वर्षों से ‘तुलनात्मक रूप से आसान’ थी।
छात्रों की ओर से यह तर्क भी दिया गया कि 720 के अधिकतम अंकों के बाद अगला उच्चतम संभव स्कोर 716 हो सकता था, लेकिन कई छात्रों को 718 और 719 अंक प्राप्त हुए हैं। NTA ने स्पष्टीकरण दिया कि छह टॉपर्स सहित कुछ उम्मीदवारों को ‘समय की हानि के लिये प्रतिपूरक अंक’ दिए गए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय:
केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि वह उन 1,563 छात्रों के लिये दोबारा परीक्षा आयोजित करेगा, जिन्हें NEET-UG 2024 में ग्रेस मार्क्स दिए गए थे। यह पुनः परीक्षा 23 जून को आयोजित की गई।
सर्वोच्च न्यायालय ने एडमिशन काउंसलिंग प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाने का निर्णय लिया। कहा गया कि यदि 1,563 उम्मीदवारों में से कोई भी पुनः आयोजित परीक्षा में शामिल नहीं होता है तो उसके पिछले अंकों को बिना ग्रेस मार्क्स के परिणाम के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
सरकार का रुख:
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित अनियमितताएँ “राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की संस्थागत विफलता” है।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और निष्पक्ष परीक्षा संचालन की जाँच के लिये इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषणा की।
इस सात सदस्यीय समिति द्वारा दो माह में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
केंद्र सरकार ने NTA प्रमुख को अपने पद से हटाते हुए उन्हें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में ‘कंपलसरी वेट’ के लिये भेज दिया है।
बिहार में जाँचकर्त्ताओं द्वारा पेपर लीक के साक्ष्य मिलने के बाद CBI ने इस मामले की जाँच अपने हाथ में ले ली है।
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत नियम अधिसूचित कर दिए गए हैं।

भारत में शिक्षा और परीक्षा के संबंध में विभिन्न प्रावधान क्या हैं?

संवैधानिक अधिदेश:
शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21A): यह अनुच्छेद 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिये निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है। इसे 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा शामिल किया गया था।
समता का अधिकार (अनुच्छेद 14): यह भारत के राज्य क्षेत्र में विधि के समक्ष समता और विधियों का समान संरक्षण सुनिश्चित करता है। यह सिद्धांत निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण शैक्षिक अवसरों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
भेदभाव का प्रतिषेध (अनुच्छेद 15): यह धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव को प्रतिषिद्ध करता है। यह नागरिकों के किसी भी सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग या अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों की उन्नति के लिये विशेष प्रावधानों की अनुमति देता है।
शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देना (अनुच्छेद 46): राज्य, जनता के दुर्बल वर्गों के, विशिष्टतया, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के शैक्षिक एवं आर्थिक हितों की विशेष सावधानी से अभिवृद्धि करेगा और उन्हें सामाजिक अन्याय एवं सभी प्रकार के शोषण से उनकी संरक्षा करेगा।
प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (अनुच्छेद 45): राज्य सभी बच्चों को छह वर्ष की आयु पूरी करने तक प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा प्रदान करने के लिये उपबंध करने का प्रयास करेगा।
शिक्षा के अवसर प्रदान करने का मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51A): प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह अपने 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चे या प्रतिपाल्य को शिक्षा के अवसर प्रदान करे।
सरकारी पहलें:
नई शिक्षा नीति 2020
सर्व शिक्षा अभियान
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान
राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA)
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF)

सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024 भारत में परीक्षा कदाचार से निपटने में किस हद तक सक्षम है?

पक्ष में तर्क

कंप्यूटर आधारित परीक्षा:
नियमावली में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के पूर्ण मानदंड निर्धारित किये गए हैं।
इसमें अभ्यर्थियों के पंजीकरण, केंद्रों के आवंटन, प्रवेश पत्र जारी करने से लेकर प्रश्नपत्रों को खोलने एवं वितरित करने, उत्तरों के मूल्यांकन और अंतिम सिफ़ारिशों तक की समस्त प्रक्रिया शामिल है।
राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी की भूमिका:
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (National Recruitment Agency- NRA) हितधारकों के परामर्श से CBT के लिये मानदंड, मानक और दिशा-निर्देश तैयार करेगी। अंतिम रूप दिए जाने के बाद इन मानदंडों को केंद्र द्वारा अधिसूचित किया जाएगा।
मानदंडों में भौतिक एवं डिजिटल अवसंरचना, SOPs, कैंडिडेट चेक-इन, बायोमीट्रिक पंजीकरण, सुरक्षा, निरीक्षण और पोस्ट-एग्जाम गतिविधियाँ शामिल होंगी।
केंद्र समन्वयक:
केंद्र/राज्य सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, विश्वविद्यालयों या अन्य सरकारी संगठनों के सदस्य केंद्र समन्वयक के रूप में नियुक्त किये जाएँगे।
केंद्र समन्वयक विभिन्न सेवा प्रदाताओं और परीक्षा प्राधिकरण की गतिविधियों के समन्वय के लिये तथा परीक्षा के लिये सभी मानदंडों, मानकों एवं दिशानिर्देशों के अनुपालन की देखरेख के लिये सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरण का प्रतिनिधि होगा।
सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरणों को परिभाषित करना:
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की धारा 2(k) ‘सार्वजनिक परीक्षा’ को अधिनियम की अनुसूची में सूचीबद्ध “सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरण द्वारा आयोजित कोई भी परीक्षा’’ के रूप में परिभाषित करती है।
अनुसूची में सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरणों की सूची दी गई है जिनमें UPSC, SSC, RRBs, IBPS, NTA और केंद्र सरकार के अन्य मंत्रालय/विभाग शामिल हैं।
अनुचित साधनों का प्रयोग:
अधिनियम की धारा 3 में 15 ऐसी कार्रवाइयों की सूची दी गई है जिन्हें “आर्थिक या अनुचित लाभ के लिये” सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों का उपयोग करने के समान माना गया हैं।
इसमें प्रश्नपत्र लीक करना, उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ करना और अनधिकृत समाधान उपलब्ध कराना शामिल है।
नए नक़ल विरोधी (एंटी-चीटिंग) कानून में गैर-जमानती प्रावधान:
इस अधिनियम में चीटिंग या नक़ल पर अंकुश लगाने के लिये न्यूनतम तीन से पाँच वर्ष के कारावास के दंड का तथा धोखाधड़ी के संगठित अपराधों में शामिल लोगों के लिये पाँच से दस वर्ष के कारावास और न्यूनतम एक करोड़ रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।

विपक्ष में तर्क:

मौजूदा नक़ल विरोधी कानून:
आलोचकों का तर्क है कि केवल कठोर दंड से नक़ल पर रोक नहीं लगेगी, क्योंकि मौजूदा कानूनों के तहत इस तरह के अपराध पहले से ही दंडनीय हैं।
कई राज्यों में एंटी-चीटिंग कानून मौजूद हैं, लेकिन नक़ल फिर भी जारी है जो इनकी सीमित प्रभावशीलता को दर्शाता है।
राजस्थान, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड ऐसे राज्यों में शामिल हैं।
संगठित चीटिंग/नक़ल का प्रचलन:
राजनीतिक संबंध रखने वाले संगठित अपराधियों द्वारा नक़ल को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे कानूनों का प्रवर्तन जटिल हो जाता है।
नक़ल के नए-नए तरीके और हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियाँ मौजूदा चुनौती को उजागर करती हैं।
इसके उदाहरणों में IIT प्रवेश परीक्षा में रूसी हैकर्स द्वारा सेंध लगाना और अभ्यर्थियों द्वारा नक़ल के लिये ब्लूटूथ डिवाइस का उपयोग करना शामिल है।
दंडात्मक उपायों पर ध्यान केंद्रित करना:
कुछ आलोचकों का मानना है कि परीक्षा कदाचार में संलग्न लोगों पर दंडात्मक कार्रवाई पर अधिक ध्यान केंद्रित करने से शिक्षा, पाठ्यक्रम, मूल्यांकन विधियों और छात्रों के लिये सहायता प्रणालियों में प्रणालीगत सुधारों की आवश्यकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
लोगों के भरोसे की कमी:
परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता में आम लोगों का भरोसा कम हो रहा है, जिसके कारण विरोध प्रदर्शन, मुक़दमेबाजी और विभिन्न हितधारकों की ओर से सुधार की मांग बढ़ रही है।
परीक्षा परिणामों पर विवाद और विरोध (जैसे रेलवे भर्ती परीक्षा) ध्यान दिलाते हैं कि परीक्षा प्रणाली में जारी समस्याओं का प्रभावी ढंग से समाधान किया जाना चाहिये।
राज्य सरकारों का विवेक:
यद्यपि इस अधिनियम का उद्देश्य राज्यों के लिये एक मॉडल प्रस्तुत करना है, तथापि राज्य सरकारों को प्राप्त विवेकाधिकार के कारण विभिन्न राज्यों में इसके कार्यान्वयन में भिन्नता प्रकट हो सकती है।
इससे सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के प्रयोग को रोकने में कानून की प्रभावशीलता कमज़ोर पड़ सकती है।

भारत में निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने के लिये कौन-से कदम उठाए जाने चाहिये?

राष्ट्रीय परीक्षा अखंडता परिषद का गठन करना:
देश भर में सभी प्रमुख परीक्षाओं के संचालन की देखरेख करने तथा एक समान मानकों और अभ्यासों को सुनिश्चित करने के लिये सरकार को एक राष्ट्रीय परीक्षा अखंडता परिषद (National Examination Integrity Council- NEIC) के गठन पर विचार करना चाहिये।
यह परिषद परीक्षा प्रक्रियाओं की प्रभावशीलता का आकलन करने तथा सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने के लिये नियमित लेखापरीक्षण कर सकती है।
दोषरहित एवं पूर्ण मानक प्रचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedures- SOPs) और उनके अनुपालन के रूप में सुदृढ़ शासन स्थापित किया जाना चाहिये।
पारदर्शी भर्ती और जवाबदेही
यह सुनिश्चित किया जाए कि परीक्षा निकायों में प्रमुख पद योग्यता एवं निष्ठा के आधार पर भरे जाएँ, ताकि भ्रष्टाचार और मिलीभगत की संभावना कम हो।
प्रतिशोध के भय के बिना कदाचार की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने के लिये एक सुदृढ़ मुखबिर संरक्षण तंत्र (whistleblower protection mechanisms) स्थापित किया जाए।
ऑन-डिमांड टेस्टिंग:
GRE के समान ऑन-डिमांड कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग मॉडल की ओर आगे बढ़ा जाए, जहाँ छात्र अपनी सुविधानुसार अपनी परीक्षाओं का समय निर्धारित कर सकते हैं। इससे एक ही दिन में लाखों लोगों के लिये परीक्षा आयोजित करने का बोझ कम हो जाएगा और पेपर लीक का जोखिम भी कम हो जाएगा।
प्रत्येक विषय के लिये प्रश्नों का एक बड़ा समूह विकसित किया जाए, ताकि तंत्र प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये अद्वितीय प्रश्नपत्र तैयार कर सके और नक़ल के अवसरों को न्यूनतम किया जा सके।
डिजिटल सुरक्षा उपाय:
प्रश्नपत्र सेट करने से लेकर परिणाम घोषित करने तक परीक्षा प्रक्रियाओं का अपरिवर्तनीय रिकॉर्ड बनाने के लिये ब्लॉकचेन का उपयोग किया जाए। इससे किसी भी तरह की हेरफेर का आसानी से पता लगाया जा सकेगा।
प्रश्न पत्रों और अभ्यर्थियों की सूचना को अनधिकृत पहुँच से बचाने के लिये अत्याधुनिक एन्क्रिप्शन तकनीकों का उपयोग किया जाए।
कठोर प्रवर्तन:
परीक्षा के दौरान बेहतर पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने के लिये निरीक्षक-छात्र अनुपात को कम किया जाए।
सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024 को सख्ती से लागू किया जाना चाहिये, जिसमें कदाचार के लिये जुर्माना, कारावास और भविष्य की परीक्षाओं में बैठने पर आजीवन प्रतिबंध जैसे कठोर दंड का प्रावधान होना चाहिये।
सुरक्षित परिवहन और भंडारण:
भौतिक परीक्षा सामग्री के परिवहन के लिये हेरफेर-रोधी पैकेजिंग और GPS ट्रैकिंग का उपयोग किया जाए। भंडारण सुविधाएँ अत्यधिक सुरक्षित होनी चाहिये और उन पर 24/7 निगरानी होनी चाहिये।
सभी परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएँ ताकि सभी गतिविधियों की व्यापक कवरेज सुनिश्चित हो सके। किसी भी विवाद या कदाचार के आरोपों के मामले में रिकॉर्ड किये गए फुटेज की समीक्षा की जानी चाहिये।
पोस्ट-एग्जाम प्रक्रियाएँ:
डबल-ब्लाइंड मूल्यांकन प्रक्रिया (double-blind evaluation processes) लागू की जाए, जहाँ कई परीक्षक स्वतंत्र रूप से उत्तर पुस्तिकाओं की ग्रेडिंग करें। इससे पक्षपात और त्रुटियों की संभावना कम हो जाएगी।
परीक्षा परिणाम से संबंधित विसंगतियों या शिकायतों के त्वरित समाधान के लिये एक समर्पित प्रकोष्ठ की स्थापना की जाए।
परीक्षा का दबाव कम करना:
मूल्यांकन प्रक्रिया के अंग के रूप में सतत मूल्यांकन, परियोजना कार्य और साक्षात्कार को शामिल करते हुए एकदिवसीय परीक्षाओं पर अत्यधिक निर्भरता को कम किया जाए।
NEP 2020 लर्निंग मूल्यांकन को योगात्मक दृष्टिकोण (जो मुख्य रूप से रटकर याद करने की परख करता है) को एक ऐसे अधिक नियमित, रचनात्मक एवं योग्यता-आधारित प्रणाली से प्रतिस्थापित करने का लक्ष्य रखता है जो विश्लेषण, आलोचनात्मक चिंतन एवं वैचारिक स्पष्टता जैसे उच्च-क्रम कौशल का मूल्यांकन करता है।
सांस्कृतिक और शैक्षिक बदलाव:
परीक्षाओं में ईमानदारी के महत्त्व के प्रसार के लिये छात्रों, शिक्षकों और परीक्षा अधिकारियों हेतु नैतिकता एवं सत्यनिष्ठा पर कार्यशालाएँ और सेमिनार आयोजित किये जाएँ।
परीक्षा कदाचार के दुष्परिणामों को उजागर करने और निष्पक्षता एवं कठोर श्रम की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिये जागरूकता अभियान शुरू किये जाएँ।

निष्कर्ष

बेहतर निगरानी, सुदृढ़ शासन ढाँचे और व्यापक हितधारक संलग्नता के माध्यम से हर स्तर पर सत्यनिष्ठा की संस्कृति को बढ़ावा देकर परीक्षाओं की पवित्रता की रक्षा की जा सकती है। यह दृष्टिकोण न केवल लाखों छात्रों की आकांक्षाओं की रक्षा करेगा, बल्कि भारत की शैक्षिक नींव को भी सुदृढ़ करेगा, जिससे अधिक न्यायसंगत एवं योग्यता आधारित समाज का मार्ग प्रशस्त होगा।

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