Current Affairs For India & Rajasthan | Notes for Govt Job Exams

होलोकॉस्ट और द्वितीय विश्व युद्ध

FavoriteLoadingAdd to favorites

चर्चा में क्यों?

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग द्वितीय विश्व युद्ध के अत्याचारों के बारे में गलत सूचना तथा नफरत से प्रेरित कहानियों को प्रसारित करने के लिये किया जा रहा है।

  • इसमें यह भी चेतावनी दी गई है कि AI द्वारा होलोकॉस्ट से संबंधित असत्य या भ्रामक विषय वस्तु का निर्माण भी हो सकता है, जिससे यहूदी-विरोधी (यहूदी लोगों के प्रति घृणा, पूर्वाग्रह) भावना के प्रसार को बढ़ावा मिल सकता है।

होलोकॉस्ट: 

  • परिचय:
    • ‘होलोकॉस्ट’ शब्द ग्रीक भाषा के “होलोकॉस्टन” से प्रेरित है, जिसका अर्थ है “आग से भस्म होने वाली भेंट”।
    • यह शब्द एडोल्फ हिटलर के नाजी शासन द्वारा लगभग 6 मिलियन यूरोपीय यहूदियों के उत्पीड़न एवं हत्या को संदर्भित करता है।
    • यह घटना वर्ष 1941 से 1945 के बीच की है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1933 से (जब एडोल्फ हिटलर जर्मनी में सत्ता में आया था) हो गई थी।
  • कारण:
    • यहूदी विरोधी भावना और नस्लीय शुद्धता के प्रति प्रतिबद्धता से प्रेरित नाजियों ने यहूदियों को अपने लिये खतरा माना था। इनके द्वारा अन्य समूहों को उनकी नस्लीय, वैचारिक तथा राजनीतिक मान्यताओं के कारण भी अलग-थलग कर दिया गया।
  • ऐतिहासिक संदर्भ:
    • प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) में जर्मनी की हार और उसके बाद 1930 के दशक की वैश्विक आर्थिक महामंदी से इस देश में एक उथल-पुथल भरा माहौल हो गया था, जिसके कारण एडोल्फ हिटलर के नेतृत्व में नाजी दल का उदय हुआ था।
    • वर्ष 1933 में हिटलर को जर्मन चांसलर नियुक्त किया गया था और उसके तुरंत बाद उसने सरकार तथा देश पर अपना नियंत्रण मज़बूत करना शुरू कर दिया था।
    • सत्ता में आने के बाद हिटलर ने सभी राजनीतिक विरोधियों को दबाने, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने तथा नाजी शासन द्वारा अवांछनीय माने जाने वाले विभिन्न समूहों का उत्पीड़न करना शुरू कर दिया था।
    • नाज़ियों द्वारा समलैंगिक, रोमानी तथा विकलांगों के साथ विशेष रूप से यहूदियों को निशाना बनाया गया था।
  • यहूदियों का उत्पीड़न: 
    • जर्मनी में यहूदियों की संख्या 1% से भी कम थी, लेकिन इस समुदाय को आर्थिक रूप से विशेषाधिकार प्राप्त माना जाता था।
    • प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की हार तथा वर्ष 1930 के दशक की आर्थिक महामंदी के लिये हिटलर ने यहूदियों को दोषी ठहराया था।
    • यहूदियों से उनके नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों को छीनने के लिये कई कानून बनाए गए और साथ ही नाज़ी अर्धसैनिकों ने यहूदी समुदायों को आतंकित किया।
    • वर्ष 1938 में क्रिस्टलनचट (टूटे शीशे/काँच की रात) जैसी घटनाओं के साथ स्थिति नाटकीय रूप से बढ़ गई, जिसके दौरान नाज़ी भीड़ ने यहूदियों के स्वामित्व वाले व्यवसायों, आराधनालयों एवं घरों को नष्ट कर दिया तथा बड़ी संख्या में यहूदियों पर हमला किया और उन्हें मार डाला।
    • जैसे-जैसे उत्पीड़न बढ़ता गया, वर्ष 1939 में जर्मनी द्वारा पोलैंड पर आक्रमण के बाद द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ गया और यहूदियों की स्थिति और भी दयनीय हो गई।
      • इस आक्रमण ने हिटलर के आक्रामक विस्तारवाद की शुरुआत को चिह्नित किया जिसका उद्देश्य जर्मन लोगों के लिये लेबेन्सराम (Lebensraum- रहने की जगह) सुरक्षित करना था।
  • अंतिम समाधान:
    • “यहूदी प्रश्न का अंतिम समाधान” नाज़ियों द्वारा यहूदी आबादी को समाप्त करने के लिये लाखों यहूदियों के नरसंहार का एक व्यवस्थित और संगठित प्रयास था।
    • नाज़ियों का मानना ​​था कि यहूदियों को पलायन के लिये विवश करने की तुलना में उन्हें मारना अधिक “उचित” रहेगा।
    • इस योजना की शुरुआत यहूदी लोगों के बढ़ते हुए अलगाव के परिणामस्वरूप हुई, जिसके बाद उन्हें बलपूर्वक यातना शिविरों में भेज दिया गया।
      • लाखों यहूदियों को यातना शिविरों में भेजने एवं बलात् श्रम करवाने के साथ-साथ उन्हें जटिल परिस्थितियों में रखा गया।
    • कुछ यातना शिविरों में परिष्कृत गैस कक्ष थे, जिनका उपयोग यहूदियों और अन्य “अवांछनीय” जनसंख्या समूहों की सामूहिक हत्या के लिये किया जाता था।
  • ऑशविट्ज़ तथा यातना शिविर:
    • यातना शिविर ऐसे कारावास के स्थान थे जहाँ अवांछनीय या खतरा समझे जाने वाले लोगों को कैद करके रखा जाता था और उन पर अत्याचार किया जाता था।
    • ऑशविट्ज़ (पोलैंड में) सबसे बड़ा नाज़ी यातना शिविर था।
      • यह नरसंहार की क्रूरता का प्रतीक बन गया, क्योंकि 1.1 मिलियन से अधिक लोग, जिनमें अधिकतर यहूदी थे, यातना, भुखमरी, बीमारी और गैस चैंबरों में मारे गए।
      • वर्ष 1945 में आज़ाद हुआ यह शिविर अब पीड़ितों के लिये एक स्मारक के रूप में कार्य करता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय होलोकॉस्ट/नरसंहार स्मरण दिवस: 
    • ऑशविट्ज़ अपने कैदियों पर शिविर के सुरक्षाकर्मियों द्वारा की जाने वाली क्रूरता और अमानवीय व्यवहार के लिये कुख्यात हो गया, जो प्राय: केवल द्वेष तथा परपीड़ा का आनंद लेने के लिये उन्हें यातना देते तथा उनके साथ दुर्व्यवहार करते थे।
    • 27 जनवरी 1945 को रेड आर्मी (सोवियत संघ की सशस्त्र सेना) द्वारा शिविर को मुक्त कराने के साथ ही इसके भयानक अभियानों का अंत हो गया, इस दिन को अब पीड़ितों की स्मृति को सम्मान देने के लिये विश्व स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय होलोकॉस्ट स्मरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।

 

द्वितीय विश्व युद्ध क्या था?

  • परिचय:
    • द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) मानव इतिहास के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण और विनाशकारी संघर्षों में से एक है।
    • यह युद्ध धुरी राष्ट्रों (जर्मनी, इटली और जापान) तथा मित्र राष्ट्रों (फ्राँस, ग्रेट ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ और कुछ हद तक चीन) के बीच लड़ा गया था।
    • लगभग 100 मिलियन लोगों का सैन्यीकरण किया गया तथा 50 मिलियन लोग मारे गए (जो विश्व की जनसंख्या का लगभग 3% है)।

नोट

  • प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) मित्र राष्ट्रों (फ्राँस, रूस और ब्रिटेन) तथा धुरी राष्ट्रों (जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, ओटोमन साम्राज्य एवं बुल्गारिया) के बीच लड़ा गया था, जिसमें मित्र राष्ट्रों की जीत हुई।
  • युद्ध के कारण:
    • वर्साय की संधि: प्रथम विश्व युद्ध के बाद, विजयी मित्र शक्तियों ने जर्मनी को वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर करने के लिये मजबूर किया, जिसके तहत जर्मनी को युद्ध हेतु दोष स्वीकार करना पड़ा, क्षतिपूर्ति देनी पड़ी, क्षेत्र खोना पड़ा तथा उसे बड़ी सेना रखने पर प्रतिबंध लगाना पड़ा।
      • इस अपमान ने जर्मनी में एडोल्फ हिटलर के नेतृत्व में उग्र-राष्ट्रवाद और नाजी शासन के प्रसार का मार्ग प्रशस्त किया।
    • राष्ट्र संघ की विफलता: वैश्विक शांति बनाए रखने के लिये वर्ष 1919 में स्थापित राष्ट्र संघ अंततः सभी देशों के इसमें शामिल न होने तथा सैन्य आक्रमण को रोकने हेतु सेना के अभाव के कारण विफल हो गया।
      • उदाहरणों में संघर्षों में हस्तक्षेप करने में लीग की असमर्थता शामिल है, जैसे कि इथियोपिया पर इतालवी आक्रमण और मंचूरिया पर जापानी आक्रमण, जिससे इसकी विश्वसनीयता तथा प्रभावशीलता कम हो गई।
    • व्यापक मंदी: 1930 के दशक की वैश्विक आर्थिक मंदी ने कई देशों में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता को बढ़ा दिया, जिससे उग्रवादी आंदोलनों को बढ़ावा मिला।
      • जर्मनी और जापान जैसे देशों के सामने आई आर्थिक कठिनाइयों ने उन्हें संसाधनों तथा बाज़ारों को सुरक्षित करने के लिये आक्रामक विस्तारवादी नीतियों को अपनाने हेतु प्रेरित किया।
    • अधिनायकवादी शासन का उदय: नाजी जर्मनी, फासीवादी इटली और इंपीरियल जापान जैसे सत्तावादी तथा अधिनायकवादी शासन की स्थापना, उनकी विस्तारवादी एवं सैन्यवादी विचारधाराएँ, युद्ध के फैलने का एक प्रमुख कारक थीं।
      • ये शासन अक्सर सैन्य बल के प्रयोग के माध्यम से अपनी शक्ति और प्रभाव का विस्तार करना चाहते थे।
    • पोलैंड पर जर्मन आक्रमण (1939): यह आक्रमण म्यूनिख समझौते का उल्लंघन था और द्वितीय विश्व युद्ध के प्रारंभ का तात्कालिक कारण बना।
      • इस आक्रमण के कारण फ्राँस और यूनाइटेड किंगडम ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी, जिससे यूरोप में युद्ध की शुरुआत हो गई।
    • एशिया में जापानी विस्तार: चीन पर आक्रमण और वर्ष 1941 में पर्ल हार्बर पर हमले सहित एशिया में जापानी साम्राज्य की आक्रामकता ने संयुक्त राज्य अमेरिका को संघर्ष में ला खड़ा किया। 
      • जापान की विस्तारवादी नीतियों और प्रशांत क्षेत्र में संसाधनों तथा क्षेत्रों पर नियंत्रण की इच्छा ने प्रशांत क्षेत्र में युद्ध छिड़ने में योगदान दिया।
  • युद्ध का अंत और उसके बाद की स्थिति:
    • युद्ध का अंत: यूरोप में युद्ध 8 मई, 1945 को बर्लिन पर कब्ज़े और एडोल्फ हिटलर की आत्महत्या के बाद जर्मनी के आत्मसमर्पण के साथ समाप्त हो गया।
      • प्रशांत क्षेत्र में युद्ध हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम विस्फोट के साथ समाप्त हुआ, जिसके परिणामस्वरूप 15 अगस्त 1945 को जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया।
    •  नई महाशक्तियाँ: द्वितीय विश्व युद्ध ने देशों और महाद्वीपों की स्थिति में बदलाव ला दिया। ब्रिटेन एवं फ्राँस जैसी महाशक्तियाँ अपनी प्रमुखता खो रही हैं, उनका स्थान अमेरिका और USSR ने ले लिया है।
    • विऔपनिवेशीकरण का प्रारंभ: द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् ब्रिटेन एवं फ्राँस को महत्त्वपूर्ण घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिससे उनके विशाल औपनिवेशिक साम्राज्यों पर उनका नियंत्रण कमज़ोर हो गया, जिसके परिणामस्वरूप अफ्रीका तथा एशिया में विऔपनिवेशीकरण हुआ एवं संप्रभु राष्ट्र-राज्यों की स्थापना के लिये सीमाओं का पुनः निर्धारण किया गया।

 

 

कृत्रिम बुद्धिमत्ता:

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता या AI, वह तकनीक है जो कंप्यूटर और मशीनों को मानवीय बुद्धिमत्ता तथा समस्या-समाधान क्षमताओं का अनुकरण करने में सक्षम बनाती है।
  • यह कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित रोबोट की वह क्षमता है, जो ऐसे कार्य करती है जिन्हें आमतौर पर मनुष्य करते हैं क्योंकि उन्हें मानवीय बुद्धिमत्ता और विवेक की आवश्यकता होती है।
  • विशेषताएँ और घटक:
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता की आदर्श विशेषता इसकी तर्कसंगतता और ऐसे कार्य करने की क्षमता है, जिसके द्वारा किसी विशिष्ट लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। AI का एक उपसमूह मशीन लर्निंग (ML) है।
    • डीप लर्निंग (DL) तकनीक टेक्स्ट, इमेज या वीडियो जैसे बड़ी मात्रा में असंरचित डेटा के अवशोषण के माध्यम से इस स्वचालित शिक्षण को सक्षम बनाती हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top