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स्पाइरल गैलेक्सी पर नया अध्ययन

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चर्चा में क्यों?

हाल ही में, एक नए अध्ययन से पता चला है कि प्रारंभिक ब्रह्मांड में खगोलविदों द्वारा पूर्व में लगाए गए अनुमान से अधिक बड़ी स्पाइरल गैलेक्सी (सर्पिल आकाशगंगाएँ) थीं
स्पाइरल गैलेक्सी पर शोध की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

विद्यमान सिद्धांत: खगोल विज्ञान में यह माना जाता है कि जैसे-जैसे ब्रह्मांड गर्म एवं सघन अवस्था से ठंडा होता गया, इसमें अत्यधिक मात्रा में गर्म गैसें शामिल हो गईं। इस गैस ने गुच्छों का निर्माण किया जो अंततः गैलेक्सी का निर्माण करने में सहायक सिद्ध हुए।
ये प्रारंभिक गैलेक्सीयाँ अनियमित आकार की थीं और इनमें चपटी डिस्क नहीं थीं, जैसी कि हम आज स्पाइरल गैलेक्सी में देखते हैं।
अरबों वर्षों में जब ये गैलेक्सीयाँ ठंडी होती गईं, तब इनमें मोटी, गर्म डिस्क विकसित हुई, जो बाद में चपटी होकर स्पाइरल आर्म (सर्पिल भुजाओं) में परिवर्तित हो गईं, जिन्हें मनुष्य वर्तमान रूप में पहचानता है।
अप्रत्याशित प्रारंभिक गठन: उपरोक्त सिद्धांत के विपरीत, नए अध्ययन से पता चलता है कि स्पाइरल गैलेक्सी बहुत पहले निर्मित हुई होंगी, लगभग उसी समय जब अन्य प्रकार की गैलेक्सीयाँ विकसित हो रही थीं।
अध्ययन में 873 गैलेक्सीयों का विश्लेषण करने के लिये नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के डेटा का उपयोग किया गया, जिसमें कम से कम 216 की पहचान स्पाइरल गैलेक्सी के रूप में की गई।
शोध में पाया गया कि बिग-बैंग के बाद 3 अरब से 7 अरब वर्षों के बीच स्पाइरल आकार वाली गैलेक्सीयों का अनुपात अत्यधिक बढ़ गया, जो लगभग 8% से बढ़कर 48% हो गया।
तारों के निर्माण हेतु निहितार्थ: अध्ययन के परिणाम तारों के निर्माण की दर तथा स्पाइरल गैलेक्सीयों में पृथ्वी जैसे ग्रहों के निर्माण के लिये आवश्यक परिस्थितियों की वर्तमान समझ को प्रभावित कर सकते हैं।
सुपरनोवा से उत्पन्न स्पाइरल आर्म में भारी तत्त्वों की उपस्थिति ग्रह निर्माण हेतु महत्त्वपूर्ण है।

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST)

JWST, हबल स्पेस टेलीस्कोप का अनुवर्ती टेलीस्कोप है। यह एक बड़ा, इन्फ्रारेड टेलीस्कोप है जिसे ब्रह्मांड की दूरस्थ वस्तुओं का अवलोकन करने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
यह NASA, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) के संयुक्त सहयोग से बनाया गया है।

गैलेक्सी कितने प्रकार की होती हैं?

प्रकार

विवरण

उदाहरण

स्पाइरल गैलेक्सी

स्पाइरल भुजाओं वाली चपटी डिस्क (तारा निर्माण के सक्रिय क्षेत्र) युक्त, केंद्र में उभार। वर्जित अथवा अबर्द्धित हो सकता है।

मिल्की वे, एंड्रोमेडा गैलेक्सी

एलिप्टिकल गैलेक्सी

निर्बाध, अंडाकार या गोलाकार, गैस और धूल युक्त, अधिकतर पुराने तारे विद्यमान होते हैं।

मेसियर 87

लेंटिक्युलर गैलेक्सी

स्पाइरल और एलिप्टिकल के बीच की श्रेणी, डिस्क युक्त किंतु भुजा का अभाव।

सोम्ब्रेरो गैलेक्सी

इर्रेगुलर गैलेक्सी

कोई नियमित आकार नहीं, वामन या बृहद हो सकता है।

बृहद मैगेलैनिक मेघ

एक्टिव गैलेक्सी

सुपरमैसिव ब्लैक होल द्वारा संचालित, तारों की तुलना में केंद्र से 100 गुना अधिक प्रकाश उत्सर्जित करता है।

विभिन्न उपप्रकार

सीफर्ट गैलेक्सी

सबसे सामान्य सक्रिय आकाशगंगा, इन्फ्रारेड और एक्स-रे का उत्सर्जित करती है।

टाइप I और II सीफर्ट आकाशगंगाएँ

क्वासर

सर्वाधिक चमकदार सक्रिय आकाशगंगा, स्पेक्ट्रम और विभिन्न प्रबल जेट में प्रकाश उत्सर्जित करती है।

मार्केरियन 231

ब्लेज़ार

पृथ्वी की ओर निर्देशित जेट वाली सक्रिय आकाशगंगाएँ, अत्यधिक दीप्तिमान।

TXS 0506+056

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स:

प्रश्न. निम्नलिखित परिघटनाओं पर विचार कीजिये: (2018)

प्रकाश ,गुरुत्व द्वारा प्रभावित होता है। ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है। पदार्थ अपने चारों ओर के दिक्काल को विकुंचित (वार्प) करता है।

उपर्युक्त में से एल्बर्ट आइंस्टीन के आपेक्षिकता के सामान्य सिद्धांत का/के भविष्य कथन कौन सा/से है/हैं, जिसकी/जिनकी प्रायः समाचार माध्यमों में विवेचना होती है?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)

प्रश्न: निम्नलिखित घटनाओं पर विचार करें: (2013)

संध्या के समय सूर्य का आकार भोर के समय सूर्य का रंग भोर के चंद्रमा का दिखाई देना आकाश में तारों का टिमटिमाना आकाश में ध्रुव तारा दिखाई देना

उपर्युक्त में से क्या दृष्टिभ्रम हैं?

(a) 1, 2 और 3
(b) 3, 4 और 5
(c) 1, 2 और 4
(d) 2, 3 और 5

उत्तर: (c)
रैपिड फायर
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संपूर्णता अभियान

टैग्स: रैपिड फायर करेंट अफेयर्सप्रारंभिक परीक्षाशासन व्यवस्था में ईमानदारी

स्रोत: पी.आई.बी.

नीति आयोग ने 4 से 30 सितंबर 2024 तक 3 महीने का ‘संपूर्णता अभियान’ शुरू किया है।

इसका उद्देश्य आकांक्षी ज़िलों में 6 चिन्हित संकेतकों और आकांक्षी ब्लॉकों में 6 संकेतकों में संतृप्ति प्राप्त करना है।
आकांक्षी जिले/ब्लॉक भारत के वे जिले/ब्लॉक हैं, जो खराब सामाजिक-आर्थिक संकेतकों से प्रभावित हैं।

आकांक्षी जिला कार्यक्रम (ADP) और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम (ABP)

कार्यक्रम

आकांक्षी जिला कार्यक्रम(ADP)

आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम (ABP)

प्रारंभ

2018

2023

उद्धेश्य

देश भर के 112 ज़िलों में शीघ्रतापूर्वक एवं प्रभावी परिवर्तन लाना

देश भर के 500 ब्लॉकों (329 ज़िलों) में आवश्यक सरकारी सेवाओं की संतृप्ति के लिये

विषय-वस्तु (Themes)

स्वास्थ्य एवं पोषण
शिक्षा
कृषि एवं जल संसाधन
वित्तीय समावेशन एवं कौशल विकास
बुनियादी ढांँचा

 

स्वास्थ्य एवं पोषण
शिक्षा
कृषि एवं संबद्ध सेवाएँ
बुनियादी अवसंरचना
सामाजिक विकास

संकेतकों की संख्या

81

40

और पढ़ें: आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम
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महिलाओं के लिये व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम

टैग्स: रैपिड फायर करेंट अफेयर्सप्रारंभिक परीक्षासामान्य अध्ययन-Iमहिलाओं से संबंधित मुद्देसामान्य अध्ययन-IIस्वास्थ्यमहिलाओं की भूमिका

स्रोत: द हिंदू

फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटीज़ ऑफ इंडिया (FOGSI) ने महिलाओं के लिये एक व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया है जिसका उद्देश्य समग्र भारत में वयस्क नागरिकों को टीकाकरण के बारे में जागरूक करना है। चूँकि पुरुषों की अपेक्षा, महिलाएँ 25% अधिक समय अस्वस्थता में जीवन निर्वाह करती हैं इसलिये इस पहल का उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य की गुणवत्ता में सुधार करना है।

यह पहल महिलाओं की वैक्सीन-निवार्य रोगों (Vaccine-Preventable Diseases- VPD) से रक्षा करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।
VPD जीवाणु या विषाणु के कारण होते हैं और टीकों से इनकी रोकथाम की जा सकती है। इनके कारण दीर्घकालिक व्याधि और मृत्यु भी हो सकती है। चिकनपॉक्स, डिप्थीरिया और पोलियोवायरस संक्रमण VPD के प्रमुख उदाहरण हैं।
भारत सरकार ने देश में टीकाकरण कवरेज बढ़ाने के लिये दो व्यापक पहल की हैं।
यूनिवर्सल इम्यूनाइज़े शन प्रोग्राम (UIP) में 12 वैक्सीन-निवार्य रोगों के निदान के लिये निःशुल्क टीकाकरण किया जाता है, जिसमें डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टेटनस, पोलियो, खसरा, रूबेला, क्षय रोग, हेपेटाइटिस बी और हीमोफिलस इन्फ्लुएंज़ा टाइप बी के कारण होने वाले मेनिन्जाइटिस तथा निमोनिया जैसी 9 राष्ट्रीय स्तर पर लक्षित बीमारियाँ शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, UIP के तहत टीकाकरण से छूटे बच्चों के टीकाकरण के लिये वर्ष 2014 में मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत की गई थी। इसके चार चरणों के माध्यम से 2.53 करोड़ से अधिक बच्चों और 68 लाख गर्भवती महिलाओं को जीवन रक्षक टीके लगाए गए।
FOGSI स्वास्थ्य सेवाओं, प्रजनन संबंधी अधिकारों को बढ़ावा देने और मातृ मृत्यु दर को कम करने के माध्यम से भारत में प्रसूति तथा स्त्री रोग चिकित्सकों का समर्थन करता है।

और पढ़ें: वैश्विक टीकाकरण पर WHO की रिपोर्ट, आधुनिक टीकों की स्थायित्व की खोज
रैपिड फायर
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अमेरिका का 248वाँ स्वतंत्रता दिवस

टैग्स: रैपिड फायर करेंट अफेयर्सप्रारंभिक परीक्षाउपनिवेशवाद

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

हाल ही में अमेरिका ने 4 जुलाई 2024 को अपने स्वतंत्रता दिवस की 248वीं वर्षगाँठ मनाई है।

4 जुलाई 1776 को द्वितीय महाद्वीपीय कॉन्ग्रेस द्वारा स्वतंत्रता की घोषणा को अपनाने के बाद अमेरिका को एक संप्रभु राष्ट्र घोषित किया गया।
इस दिन ब्रिटिश उपनिवेशों का ग्रेट ब्रिटेन से पृथक्करण हुआ था।
स्वतंत्रता के लिये संघर्ष वर्ष 1775 में शुरू हुआ जब 13 अमेरिकी उपनिवेशों ने किंग जॉर्ज तृतीय के अधीन ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता की मांग की।
इस संघर्ष ने अमेरिकी क्रांतिकारी युद्ध (1775-1783) को जन्म दिया, जो उपनिवेशों की स्वशासन और दमनकारी ब्रिटिश नीतियों से मुक्ति की इच्छा से प्रेरित था।
अमेरिकी उपनिवेशों ने घोषणा-पत्र स्वीकृत होने के दो दिन पहले 2 जुलाई 1776 को स्वतंत्रता की घोषणा के लिये मतदान किया और 13 में से 12 उपनिवेशों ने आधिकारिक तौर पर ग्रेट ब्रिटेन के साथ राजनीतिक संबंध तोड़ने का फैसला किया।
अमेरिकी क्रांतिकारी युद्ध के कारणों में आर्थिक विकास में बाधा डालने वाले ब्रिटिश व्यापार प्रतिबंध, पश्चिम की ओर विस्तार पर प्रतिबंध, ज्ञानोदय विचारकों का प्रभाव, उपनिवेशों पर कर लगाने के ब्रिटिश प्रयास, ब्रिटिश संसद में प्रतिनिधित्व की कमी और औपनिवेशिक असंतोष को बढ़ाने वाले कोएर्सिव एक्ट जैसे कठोर उपाय शामिल थे।

और पढ़ें: संयुक्त राज्य अमेरिका का 244वाँ स्वतंत्रता दिवस
रैपिड फायर
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घड़ियाल

टैग्स: रैपिड फायर करेंट अफेयर्सप्रारंभिक परीक्षासामान्य अध्ययन-IIIसंरक्षण

स्रोत: द हिंदू

असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व में एकल मादा घड़ियाल की उपस्थिति से ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली (BRS) में इस प्रजाति के पुनरुद्धार की आशा है।

घड़ियाल (गेवियलिस गैंगेटिकस) अपनी लंबी थूथन के कारण अन्य मगरमच्छों से भिन्न होते है। ऐसा माना जाता है कि यह 1950 के दशक में BRS से विलुप्त हो गए थे, और साथ ही 1990 के दशक में इनकों यहाँ देखा गया था।
भारतीय वन्यजीव संस्थान के अनुसार, घड़ियाल भारत, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल तथा पाकिस्तान की ब्रह्मपुत्र, गंगा, सिंधु एवं महानदी-ब्राह्मणी-बैतरणी नदी प्रणालियों में व्यापक रूप से पाए जाते हैं।
वर्तमान में, उनकी प्रमुख आबादी गंगा की तीन सहायक नदियों (भारत में चंबल और गिरवा, तथा नेपाल में राप्ती-नारायणी नदी) में पाई जाती है।
IUCN की रेड लिस्ट के अनुसार निर्माण परियोजनाओं एवं जल निकासी के कारण इसके नदी पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव पड़ने के कारण घड़ियाल गंभीर रूप से संकतग्रस्त है।

और पढ़ें: घड़ियाल, ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली (BRS)
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