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लुप्तप्राय हिमालयी जीवों पर वनाग्नि के कारण संकट

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चर्चा में क्यों?

वन विभाग के अनुसार, उत्तराखंड में प्रत्येक वर्ष घटित होने वाली वनाग्नि क्षेत्र के बहुमूल्य वन संसाधनों जैसे: पेड़, पौधों, झाड़ियों, जड़ी-बूटियों और मृदा की मोटी उर्वर परतों को काफी नुकसान पहुँचाती है।

  • इससे लुप्तप्राय हिमालयी जीवों जैसे- वन्य जीवों, सरीसृपों, स्तनधारियों, पक्षियों, तितलियों, मधुमक्खियों और मृदा को समृद्ध करने वाले जीवाणुओं पर भी संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

मुख्य बिंदु:

  • चीयर तीतर, कलिज तीतर, रूफस-बेलिड कठफोड़वा, कॉमन रोज़, चॉकलेट पैंसी एवं कौवा जैसी एवियन प्रजातियों का प्रजनन काल मार्च से जून तक होता है और यही वह अवधि है जब इस क्षेत्र के वनों में सबसे अधिक आगजनी की घटना होती है।
  • हिमालयी तितलियों के संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहे एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) के अनुसार, हिमालय क्षेत्र में तितलियों की कुल 350 प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिनमें 120 प्रजातियाँ लुप्त होने के कगार पर हैं क्योंकि ये वनाग्नि की घटना में नष्ट हुए पोषण देने वाले पौधों पर ही प्रजनन के लिये आश्रित होती हैं।
  • देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान द्वारा पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में पाए जाने वाले येलो हेडेड कछुए पर वनाग्नि के प्रभाव पर भी शोध किया जा रहा है।
  • यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची 4 में सूचीबद्ध है और इसके लुप्तप्राय होने के कारण यह वन्य जीवों और वनस्पतियों की संकटग्रस्त प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) के परिशिष्ट में भी दर्ज किया गया है।
  • वन विभाग के अनुसार, नवंबर 2023 से अब तक उत्तराखंड में वनाग्नि की घटना ने 1,437 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्रों को प्रभावित किया है।

चीयर तीतर (Cheer Pheasant) 

 

  • चीयर तीतर (Catreus wallichii), जिसे वालिश तीतर के नाम से भी जाना जाता है, तीतर वर्ग Phasianidae की एक सुभेद्य प्रजाति है।
  • यह Catreus प्रजाति का एकमात्र सदस्य है।
  • IUCN रेड लिस्ट स्थिति: 
  • CITES स्थिति: परिशिष्ट-I
  • WPA: अनुसूची-I

रूफस-बेलिड कठफोड़वा (Rufous-Bellied Woodpecker )

 

  • रूफस-बेलिड कठफोड़वा (Dendrocopos hyperythrus) Picidae वर्ग में पक्षी की एक प्रजाति है।
  • यह भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया में हिमालय के क्षेत्रों में पाया जाता है।
  • इसके प्राकृतिक आवास उपोष्णकटिबंधीय या उष्णकटिबंधीय आर्द्र तराई-वन तथा उपोष्णकटिबंधीय या उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्वतीय वन हैं।
  • IUCN रेड लिस्ट स्थिति: कम चिंतनीय
  • CITES स्थिति: मूल्यांकन नहीं किया गया
  • WPA: अनुसूची-IV

 

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