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मानचित्र

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मानचित्र – पृथ्वी की सतह या इसके एक भाग का पैमाने के माध्यम से चपटी सतह पर खींचा गया चित्र है।

 

1 विश्व ग्लोब के निर्माता – मार्टिन बैहम

2 विश्व मानचित्र के निर्माणकर्त्ता – अनेग्जी मेण्डर

3 भूगोल के जनक – हिकेटियस

4 व्यवस्थित भूगोल के जनक – इरैटोस्थनीज

 

भौतिक मानचित्र – पृथ्वी की प्राकृतिक ; जैसे पर्वतों , पठारों , मैदानों , नदियों महासागरों इत्यादि को दर्शाने वाले मानचित्र को कहते है।

 

राजनितिक मानचित्र – राज्यों , नगरों , शहरों तथा गाँवों और विश्व के विभिन्न देशों व् राज्यों तथा उनकी सीमाओं को दर्शाने वाले मानचित्र को को कहते है।

 

थीमैटिक मानचित्र – कुछ मानचित्र विशेष जानकारियाँ प्रदान करते हैं ; जैसे सड़क मानचित्र , वर्षा मानचित्र , वन तथा उद्योग आदि के विवरण दर्शाने वाले मानचित्र इत्यादि।

 

मानचित्र के तीन घटक हैं – दूरी , दिशा और प्रतीक।

1. दूरी – मानचित्र एक आरेखण होता है जो की पुरे विश्व या उसके एक भाग को छोटा मानचित्र के छोटे पैमाने पे खीचें जाते है।

2. दिशा – अधिकतर मानचित्र में ऊपर दाहिनी तरफ तीर का निशान बना होता है। ये तीर का निशान दिशा को दर्शाता है।

3. प्रतीक – किसी भी मानचित्र पर वस्तविक आकार एवं प्रकार में विभिन्न आकृतियों ; जैसे भवनों , सड़को , पुलों , वृक्षों , रेल की पटरियों या कुएँ को दिखाना संभव नहीं होता है। इसलिए , वे निश्चित अक्षरों , छायाओं , रंगों , चित्रों तथा रेखाओं का उपयोग करके दर्शाए जाते हैं।

रूढ़ प्रतीक – विभिन्न रंगो का उपयोग भी इसी उद्देश्य से किया जाता है। उदाहरण के लिए सामान्यत : नील रंग का इस्तेमाल जलाशयों , भूरा रंग पर्वतों , पीला रंग पठारों , और हरा रंग मैदानों को दर्शाने के लिए किया जाता है।

रेखाचित्र – आप अपने मित्र के घर जाना चाहते है , लेकिन आपको रस्ते की जानकारी नहीं है। आपका मित्र अपने घर के रास्ते को बताने के लिए एक कच्चा आरेखण बना सकता है।

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