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भारत पर FATF की पारस्परिक मूल्यांकन रिपोर्ट

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चर्चा में क्यों?

हाल ही में वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) ने भारत पर एक पारस्परिक मूल्यांकन रिपोर्ट (Mutual Evaluation Report- MER) जारी की, जिसे सिंगापुर में आयोजित उनके पूर्ण सत्र के दौरान अनुमोदित किया गया। इसमें विशेष रूप से धन शोधन (Money Laundering- ML), आतंकवादी वित्तपोषण (Terrorist Financing- TF) और प्रसार हेतु वित्तपोषण (Proliferation Financing) से निपटने में भारत के प्रयासों का मूल्यांकन किया गया।
MER रिपोर्ट से संबंधित प्रमुख बिंदु क्या हैं?

भारत पर पारस्परिक मूल्यांकन रिपोर्ट:
नियमित अनुवर्ती श्रेणी:
भारत को ‘नियमित अनुवर्ती’ (Regular Follow-Up) श्रेणी में रखा गया है जिससे यह एक ऐसे विशेष समूह में शामिल हो गया है जिसमें केवल चार देश- यूनाइटेड किंगडम, फ्राँस, इटली और अन्य G20 देश शामिल हैं।
‘नियमित अनुवर्ती’ का अर्थ है कि भारत को केवल अक्तूबर 2027 में अनुशंसित कार्यों पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
FATF, सदस्य देशों को चार श्रेणियों में से किसी एक में रखता है अर्थात् ‘नियमित अनुवर्ती’, ‘वर्द्धित अनुवर्ती’ (Enhanced Follow-Up), ‘ग्रे लिस्ट’ और ‘ब्लैक लिस्ट’।
नियमित अनुवर्ती उक्त 4 श्रेणियों में शीर्ष श्रेणी है और पारस्परिक मूल्यांकन रिपोर्ट के बाद भारत सहित G20 में केवल 5 देशों को नियमित अनुवर्ती में रखा गया है।
JAM ट्रिनिटी के माध्यम से डिजिटल अर्थव्यवस्था:
जन धन, आधार, मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी और नकद लेन-देन के कठोर विनियमों द्वारा भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर हुआ है जिससे ML, TF तथा भ्रष्टाचार एवं संगठित अपराध जैसे अपराधों से प्राप्त आय से जुड़े जोखिम सफलतापूर्वक कम हुआ हैं।

FATF क्या है?

परिचय:
FATF वर्ष 1989 में स्थापित अंतर-सरकारी संगठन है।
यह मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी वित्तपोषण और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की अखंडता से संबंधित अन्य खतरों से निपटने के लिये एक वैश्विक मानक-निर्धारक है।
उद्देश्य:
FATF का प्राथमिक उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय मानक निर्धारित करना तथा धन शोधन, आतंकवादी वित्तपोषण और सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार से निपटने हेतु उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देना है।
गठन:
FATF का गठन G7 देशों की पहल पर धन शोधन और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव के बारे में बढ़ती चिंताओं का समाधान करने के लिये किया गया था।
प्रारंभ में यह मुख्यतः मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिये सिफारिशें करने और सर्वोत्तम अभ्यास विकसित करने पर केंद्रित था।
विगत कुछ वर्षों में, इसके कार्यक्षेत्र में विस्तार हुआ और इसमें आतंकवादी वित्तपोषण की रोकथाम करने तथा नए उभरते खतरों से निपटना शामिल किया गया है।
ब्लैक लिस्ट:
ब्लैक लिस्ट में उन असहयोगी देशों या क्षेत्रों (Non-Cooperative Countries or Territories-NCCT) को शामिल किया जाता है जो आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों का समर्थन करते हैं।
अभी तक ईरान, उत्तर कोरिया और म्याँमार तीन देश ब्लैक लिस्टेड हैं।
ग्रे लिस्ट:
जिन देशों को टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग का समर्थन करने के लिये सुरक्षित स्थल माना जाता है, उन्हें FATF की ग्रे लिस्ट में डाल दिया जाता है।
यह उस देश के लिये एक चेतावनी के रूप में कार्य करता है कि उसे ब्लैक लिस्ट में शामिल किया जा सकता है।
FATF के सदस्य और पर्यवेक्षक:
FATF में वर्तमान में 37 सदस्य निकाय हैं जो दुनिया के के लगभग सभी हिस्सों के सबसे प्रमुख वित्तीय केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
39 सदस्यों में से दो क्षेत्रीय संगठन हैं: यूरोपीय आयोग और खाड़ी सहयोग परिषद।
भारत और FATF:
भारत वर्ष 2006 में ‘पर्यवेक्षक’ देशों की सूची में शामिल हुआ और वर्ष 2010 में FATF का पूर्ण सदस्य बन गया।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर MER रिपोर्ट का महत्त्व क्या है?

वैश्विक वित्तीय प्रतिष्ठा में वृद्धि:
FATF का सकारात्मक मूल्यांकन भारत की मज़बूत वित्तीय प्रणाली को दर्शाता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भरोसा बढ़ता है। यह गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक सिटी (GIFT सिटी) जैसी पहलों को और अधिक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को आकर्षित करने में मदद कर सकता है।
इस बेहतर प्रतिष्ठा से बेहतर क्रेडिट रेटिंग मिल सकती है, जिससे वैश्विक बाज़ारों में भारतीय संस्थाओं के लिये उधार लेने की लागत कम हो सकती है।
विदेशी निवेश में वृद्धि:
एक भरोसेमंद वित्तीय प्रणाली अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (foreign direct investment – FDI) को आकर्षित करने की संभावना रखती है। फिनटेक और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में, जहाँ वित्तीय अखंडता महत्त्वपूर्ण है, अमेज़ॅन और वॉलमार्ट जैसी कंपनियों ने पहले ही भारत में महत्त्वपूर्ण निवेश किया है।
डिजिटल भुगतान प्रणाली का विस्तार:
रिपोर्ट का समर्थन भारत के एकीकृत भुगतान इंटरफेस (Unified Payments Interface – UPI) के वैश्विक विस्तार का समर्थन करता है। इससे अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में UPI की व्यापक स्वीकृति हो सकती है क्योंकि UPI पहले से ही सिंगापुर और UAE जैसे देशों में चालू है इसे और देशों में विस्तारित करने की योजना है।
भारत के फिनटेक उद्योग को बढ़ावा:
सकारात्मक मूल्यांकन से भारत के फिनटेक क्षेत्र के विकास में तेज़ी आ सकती है। पेटीएम और फोनपे जैसी फिनटेक कंपनियों के लिये अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करना आसान हो सकता है। यह अधिक उद्यम पूंजी को आकर्षित कर सकता है और ब्लॉकचेन तथा डिजिटल मुद्राओं जैसे क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहित कर सकता है।
संवर्द्धित धन प्रेषण प्रवाह:
बेहतर वित्तीय प्रणालियों के साथ, अनिवासी भारतीयों (NRI) से प्राप्त धन अधिक

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