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नृत्य की ‘लास्य’ शैली अपनी प्रकृति में ‘ताण्डव’ से भिन्न है। इसकी विशेषताओं तथा शास्त्रीय नृत्य के विभिन्न प्रकारों पर इसके प्रभाव की चर्चा करें।

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उत्तर :

 

भूमिका में :-

भारतीय नाट्यशास्त्र के आधार पर लास्य व ताण्डव नृत्य के सामान्य परिचय के साथ उत्तर प्रारंभ करें।

विषय-वस्तु में :- 

लास्य और ताण्डव में अंतर को स्पष्ट करते हुए लास्य की विशेषताओं पर चर्चा कीजिये, जैसे :

  • लास्य दो प्रकार का होता है- जरिता और यौवक लास्य।
  • लास्य, ताण्डव के विपरीत कोमलता से अनुप्राणित होता है।
  • लास्य अधिक सुंदर और कभी-कभी कामुक भी होता है।

‘लास्य’ नृत्य का विभिन्न नृत्यों भरतनाट्यम, मोहिनीअट्टम, मणिपुरी पर प्रभाव का वर्णन करें, जैसे :

  • लास्य का सर्वाधिक प्रभाव भरतनाट्यम पर पड़ा है। भरतनाट्यम में उपस्थित लालित्यपूर्ण भाव-भंगिमाओं की अभिप्रेरणा ‘लास्य’ है।
  • केरल के मोहिनीअट्टम में भरतनाट्यम व कथकली, दोनों के अंश पाए जाते हैं। भरतनाट्यम का लास्य से प्रभावित लालित्य मोहिनीअट्टम का प्रमुख अंश है।
  • मणिपुरी के लावण्यमय भाव पर ‘लास्य’ का स्पष्ट प्रभाव है। हालाँकि इसमें ताण्डव के भाव भी विद्यमान रहते हैं।

अंत में प्रश्नानुसार संक्षिप्त, संतुलित एवं सारगर्भित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

नोट : निर्धारित शब्द-सीमा में उत्तर को विश्लेषित करके लिखें।

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