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अवरुद्ध मुद्रास्फीति एवं RBI की मौद्रिक नीति

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चर्चा में क्यों? 

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी नवीनतम द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में मुद्रास्फीति लक्ष्य एवं आर्थिक वृद्धि पर चर्चा के बीच लगातार आठवीं बार रेपो दर को अपरिवर्तित बनाए रखने का विकल्प चुना है।

RBI की ब्याज दरों में कमी क्यों नहीं?

  • अवरुद्ध मुद्रास्फीति (Persistent Inflation): उच्च रेपो दर होने पर भी मुद्रास्फीति वर्ष 2021 की शुरुआत से 4% के स्तर तक नहीं पहुँची है। यह गिरावट धीरे-धीरे हुई है, वर्ष 2024 के पहले चार महीनों में मुद्रास्फीति 5% के आस-पास रही। RBI “अवरुद्ध” मुद्रास्फीति के रुझान के प्रति चिंतित है।
  • अवरुद्ध मुद्रास्फीति नियंत्रण (Durable Inflation Contro):  RBI का लक्ष्य स्थिरता पर नियंत्रण रखना है, न कि 4% से नीचे हुई अस्थायी गिरावट पर।  RBI गवर्नर द्वारा 4% के लक्ष्य को “अवरुद्ध आधार पर” प्राप्त करने की प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया गया है।
  • मज़बूत जीडीपी वृद्धि: भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) विकास आश्चर्यजनक रूप से मज़बूत रहा है, जो लगातार चार वर्षों से 7% से अधिक है। RBI ने हाल ही में चालू वित्त वर्ष के सकल घरेलू उत्पाद के पूर्वानुमान को संशोधित कर 7.2% कर दिया है। इस परिदृश्य में, रेपो दरें संभवतः आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न नहीं कर रही हैं।
  • आगामी केंद्रीय बजट: RBI आगामी केंद्रीय बजट पर विचार कर रहा है, जो मुद्रास्फीति की गतिशीलता के साथ ही मौद्रिक रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकता है।

 

RBI का मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है?

  • परिचय: RBI की मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण एक मौद्रिक नीति ढाँचा है जिसे अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिये क्रियान्वित किया जाता है।
    • RBI ने एक विशिष्ट मुद्रास्फीति दर का लक्ष्य रखा है, जो वर्तमान में 4% प्रतिवर्ष निर्धारित है। यह लक्ष्य एक दीर्घकालिक औसत है और कोई कठोर सीमा या न्यूनतम सीमा नहीं है।
    • लक्ष्य के साथ +/- 2 प्रतिशत अंकों की सहनशीलता सीमा भी है। इसका अर्थ है कि RBI मुद्रास्फीति को तब तक स्वीकार्य मानता है जब तक यह 2% से 6% के दायरे में रहती है।
  • उद्देश्य: मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण का मुख्य उद्देश्य मूल्य स्थिरता प्राप्त करना तथा उसे बनाए रखना, आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, रुपए के मूल्य की रक्षा करना एवं अर्थव्यवस्था में उचित संसाधन आवंटन सुनिश्चित करना है।
  • प्रणाली: RBI द्वारा मुद्रास्फीति को प्रभावित करने के लिये मौद्रिक नीति उपकरण (मुख्य रूप से रेपो दर) का उपयोग किया जाता है।
    • रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर RBI द्वारा वाणिज्यिक बैंकों को ऋण दिया जाता है।
    • रेपो दर बढ़ाकर RBI से ऋण लेना अधिक महँगा होने से खर्च एवं निवेश हतोत्साहित होता है, जिससे अंततः मुद्रास्फीति में कमी आती है।
    • इसके विपरीत रेपो दर को कम करने से ऋण एवं खर्च को प्रोत्साहन मिलने से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है लेकिन इससे संभावित रूप से मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है।
  • सीमाएँ: मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण द्वारा आपूर्ति पक्ष के उतार-चढ़ाव या अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे जैसी संरचनात्मक बाधाओं को प्रभावी ढंग से संबोधित नहीं किया जा सकता है, जिससे मुद्रास्फीति को बढ़ावा मिल सकता है।
    • इससे खुली अर्थव्यवस्थाओं के विनिमय दर में अस्थिरता होने के साथ कमज़ोर समुदाय पर नकारात्मक सामाजिक तथा आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है।
    • इसके अतिरिक्त इससे भारत सहित सभी देशों में मुद्रास्फीति एवं अन्य व्यापक आर्थिक चरों के संदर्भ में सटीक और समय पर डेटा उपलब्धता में समस्या आ सकती है।

 

अवरुद्ध मुद्रास्फीति:

  • परिचय: अवरुद्ध मुद्रास्फीति का आशय एक ऐसी क्रमिक आर्थिक घटना से है जहाँ वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें आपूर्ति तथा मांग की गतिशीलता में परिवर्तन के साथ त्वरित रूप से समायोजित नहीं होती हैं।
    • आमतौर पर ऐसी वस्तुओं या सेवाओं की कीमतें, जिनकी त्वरित रूप से कम होने की संभावना नहीं होती है उन्हें अवरुद्ध माना जाता है।
    • इस “अवरुद्धता” के कारण मुद्रास्फीति को वांछित स्तर (जैसे कि भारत में RBI का 4% का लक्ष्य) पर वापस लाना मुश्किल हो जाता है।
  • अवरुद्ध मुद्रास्फीति की विशेषताएँ: आपूर्ति और मांग में उतार-चढ़ाव के बावजूद कीमतें उच्च बनी रहती हैं। चिकित्सा सेवाएँ, शिक्षा एवं आवास जैसे कुछ क्षेत्र विशेष रूप से अवरुद्ध मुद्रास्फीति से ग्रस्त हैं।
    • इससे आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की क्रय शक्ति क्षमता में कमी आती है।
    • इससे प्रतिकूल आर्थिक प्रभाव की संभावना के बिना मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में केंद्रीय बैंकों के लिये समस्याएँ आती हैं।
  • अवरुद्ध मुद्रास्फीति के कारण: अपरिवर्ती मूल्य निर्धारण तंत्र जैसे कारकों के कारण कीमतें, बाज़ार की स्थितियों में होने वाले परिवर्तनों से तुरंत प्रभावित नहीं होती है।
    • वेतन में वृद्धि से व्यवसायों की लागत बढ़ सकती है, जिससे मुद्रास्फीति अवरुद्ध होती है।
    • स्वास्थ्य सेवा और आवास जैसे क्षेत्रों की विशिष्ट स्थितियाँ सतत्/निरंतर मुद्रास्फीति में योगदान करती हैं।
  • अवरुद्ध मुद्रास्फीति का प्रबंधन: केंद्रीय बैंक अमूमन मुद्रास्फीति पर रोक लगाने के लिये ब्याज दरें बढ़ाते हैं, हालाँकि आर्थिक मंदी से बचने के लिये दर समायोजन को संतुलित करना महत्त्वपूर्ण है।
    • अवरुद्ध मुद्रास्फीति का सामना कर रहे विशिष्ट क्षेत्रों को संबोधित करने वाली लक्षित नीतियाँ इसके प्रभाव को कम करने में मदद कर सकती हैं।
    • अवरुद्ध मुद्रास्फीति को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिये आर्थिक पूर्वानुमानों और नीतियों का नियमित मूल्यांकन तथा समायोजन महत्त्वपूर्ण है।

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